केरल चुनाव से पहले सीपीआई(एम) में बढ़ती बगावत, पिनराई विजयन की राह में नई चुनौती
केरल चुनाव से पहले सीपीआई(एम) में बगावत बढ़ रही है। कई नेताओं के पार्टी छोड़ने और विरोध के चलते पिनराई विजयन की तीसरी जीत की राह मुश्किल होती दिख रही है।
केरल विधानसभा चुनाव से पहले वाम दल सीपीआई(एम) के भीतर असंतोष की लहर तेज होती दिख रही है, जो मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लिए चुनौती बन सकती है। 80 वर्षीय विजयन जहां लगातार तीसरी जीत हासिल करने की कोशिश में हैं, वहीं पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध के स्वर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
केरल, जिसे हाल ही में ‘केरलम’ नाम दिया गया, में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा और 140 सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
इस बार सबसे बड़ा विवाद कन्नूर जिले में सामने आया है, जो सीपीआई(एम) का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां जिला सचिव टी.के. गोविंदन ने पार्टी लाइन से हटते हुए उम्मीदवार चयन का खुला विरोध किया है। उन्होंने राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को टिकट दिए जाने पर आपत्ति जताई और खुद उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
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इसी जिले में एक और घटनाक्रम में निष्कासित नेता वी. कुन्हीकृष्णन ने पय्यन्नूर से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
अलप्पुझा में वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जी. सुधाकरण भी अंबलापुझा से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरने की तैयारी में हैं। त्रिशूर के नाटिका से सहयोगी दल के विधायक सी.सी. मुकुंदन भाजपा में शामिल हो गए हैं, जबकि इडुक्की के पूर्व विधायक एस. राजेंद्रन भी पार्टी छोड़ चुके हैं।
पालक्काड में पूर्व विधायक पी.के. ससी को अनुशासनहीनता के चलते पार्टी से निकाल दिया गया है। वहीं कोल्लम में पूर्व विधायक आइशा पोट्टी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं।
इन घटनाओं से साफ है कि पार्टी के भीतर एक साथ कई स्तरों पर असंतोष उभर रहा है। सीपीआई(एम) हमेशा एक अनुशासित संगठन के रूप में जानी जाती रही है, लेकिन इस बार अंदरूनी मतभेद उसकी छवि को चुनौती दे रहे हैं।
चुनाव से पहले यह बगावत पिनराई विजयन के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन सकती है।
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