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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन के प्रस्ताव का माकपा ने विरोध किया, वापस लेने की मांग

माकपा ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में प्रस्तावित संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि इससे अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों के अधिकार प्रभावित होंगे। पार्टी ने प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [माकपा] ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) में प्रस्तावित संशोधन का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव से अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

माकपा ने अपने बयान में कहा कि सरकार अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभार्थियों की पात्रता तय करने की मौजूदा परिवार आधारित व्यवस्था को बदलकर प्रति व्यक्ति (पर कैपिटा) व्यवस्था लागू करना चाहती है। पार्टी के अनुसार, यह बदलाव गरीब और बड़े परिवारों के हितों के खिलाफ है और इससे लाखों जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न की मात्रा कम हो सकती है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का मूल उद्देश्य देश के गरीब और कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में पात्रता के मानदंड में बदलाव करना इस कानून की भावना के विपरीत होगा।

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माकपा का कहना है कि परिवार आधारित व्यवस्था के तहत पूरे परिवार को एक इकाई मानकर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, जबकि प्रति व्यक्ति व्यवस्था लागू होने पर कई परिवारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेष रूप से बड़े और संयुक्त परिवारों पर इसका अधिक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित संशोधन को लागू करने के बजाय सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए तथा खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सभी पात्र लाभार्थियों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।

माकपा ने कहा कि महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में गरीबों के खाद्य अधिकारों को कमजोर करने वाला कोई भी कदम स्वीकार्य नहीं होगा। पार्टी ने सभी लोकतांत्रिक और जनसंगठनों से भी इस प्रस्तावित संशोधन का विरोध करने और गरीबों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की।

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