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डिकोडेड : जब टेक अरबपति अपना ठिकाना बदलने लगते हैं

गूगल के संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने कैलिफ़ोर्निया से अपने कारोबार और निवेश ढांचे के हिस्से अन्य राज्यों में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।

जब हम में से ज़्यादातर लोग नए साल की तैयारियों में व्यस्त थे, तभी पिछले साल के आखिर में एक अहम लेकिन शांत घटनाक्रम सामने आया। गूगल के संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने कैलिफ़ोर्निया से अपने कारोबार और निवेश से जुड़े ढांचों के कुछ हिस्सों को बाहर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों अरबपतियों से जुड़ी दर्जनों कंपनियों और संस्थाओं को या तो बंद कर दिया गया या फिर उन्हें अन्य राज्यों में दोबारा पंजीकृत कराया गया। इनमें नेवादा, फ्लोरिडा और टेक्सास जैसे राज्य शामिल हैं, जिन्हें कम कर दरों और अपेक्षाकृत उदार नियमों के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मियामी में एक विशाल आवास खरीदा गया है और एक निजी एयर टर्मिनल को भी अलग अधिकार क्षेत्र में ले जाया गया है।

यह बदलाव केवल व्यक्तिगत कारोबारी फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है। टेक अरबपति आज दुनिया के सबसे अधिक मोबाइल लोगों में गिने जाते हैं। वे उन सार्वजनिक व्यवस्थाओं—जैसे बुनियादी ढांचा, शिक्षा, कानून व्यवस्था और स्थिर शासन—से सबसे अधिक लाभ उठाते हैं, जिनसे उनकी कंपनियां फलती-फूलती हैं। लेकिन जब वे खुद को इन व्यवस्थाओं से बंधा हुआ महसूस नहीं करते, तो सार्वजनिक सेवाओं के लिए धन जुटाना सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की प्रवृत्ति आने वाले समय में कर नीतियों, सार्वजनिक निवेश और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ सकती है। टेक उद्योग की वैश्विक प्रकृति ने यह सवाल और भी गंभीर बना दिया है कि सार्वजनिक हितों को कैसे सुरक्षित रखा जाए, जब सबसे संपन्न और प्रभावशाली लोग आसानी से सीमाएं पार कर सकते हैं।

 

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