ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा: ग्लोबल साउथ को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
नई दिल्ली घोषणा के जरिए ब्रिक्स ने विकासशील देशों की वैश्विक भूमिका बढ़ाने, वित्तीय विकल्प मजबूत करने, व्यापार सुधार, तकनीकी सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर जोर दिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शनिवार को नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया। भारत के लिए इसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के बावजूद घोषणा पर सहमति बनी।
ब्रिक्स में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं, इसलिए किसी भी सदस्य के विरोध से संयुक्त घोषणा रुक सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन की बैठक के बाद घोषणा-पत्र अपनाए जाने की जानकारी दी। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेता मौजूद थे।
घोषणा-पत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। इसमें अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का सीधा उल्लेख नहीं किया गया।
और पढ़ें: ट्रंप की नीतियां ब्रिक्स को दे रही हैं वही महत्व, जिसे आलोचक कभी नहीं दे पाए
ब्रिक्स ने वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में सुधार की मांग की। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया।
समूह ने तत्काल साझा मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणाली की कनेक्टिविटी और न्यू डेवलपमेंट बैंक को मजबूत करने पर जोर दिया। भारत ने ब्रिक्स भुगतान प्रणालियों को जोड़ने तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी तलाशने की पहल की।
व्यापार के मोर्चे पर ब्रिक्स ने एकतरफा शुल्क, संरक्षणवाद और आर्थिक दबाव का विरोध किया। समूह विनिर्माण, एमएसएमई, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिए विकासशील देशों को केवल आपूर्तिकर्ता के बजाय उत्पादक बनाने पर भी जोर दे रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, क्वांटम तकनीक और कनेक्टिविटी को रणनीतिक प्राथमिकता दी गई। भारत ने 37 डीप-टेक नवाचार प्रदर्शित किए।
घोषणा-पत्र में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद, उसकी फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया गया।