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रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए 661.50 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस करार किया, फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर होंगे शामिल

रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने हेतु 661.50 करोड़ रुपये का करार किया। इसमें 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर की आपूर्ति हेतु ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपये का करार किया है। यह समझौता 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ।

मंत्रालय के अनुसार, खरीद को ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के तहत मंजूरी दी गई है। इस श्रेणी में स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित रक्षा उपकरणों को प्राथमिकता दी जाती है। परियोजना में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी। इससे विदेशी रक्षा तकनीक पर निर्भरता कम करने और देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर उन भारतीय नौसेना के जहाजों पर लगाए जाएंगे, जिनमें ब्रह्मोस हथियार प्रणाली पहले से मौजूद है। ब्रह्मोस नौसेना की प्रमुख सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है और समुद्री तथा जमीनी दोनों लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

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रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परियोजना से भारतीय रक्षा उद्योग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई की भागीदारी बढ़ेगी। अगले तीन वर्षों में इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। सरकार रक्षा क्षेत्र में उन्नत सैन्य प्रणालियों के स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।

ब्रह्मोस भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात का भी प्रमुख हिस्सा बन चुका है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, ब्रह्मोस के निर्यात का मूल्य 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। इंडोनेशिया और वियतनाम समेत तीन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आपूर्ति के लिए समझौते या करार मौजूद हैं। फिलीपींस को करीब 330 मिलियन डॉलर मूल्य की ब्रह्मोस प्रणालियां दी जा चुकी हैं।

वायुसेना के लिए विकसित ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च संस्करण को सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ भी सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ब्रह्मोस को भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रतीक बता चुके हैं।

नौसेना का यह नया करार युद्धपोतों की मारक क्षमता मजबूत करने के साथ घरेलू रक्षा उद्योग और उन्नत सैन्य प्रणालियों के निर्माण को भी बढ़ावा देगा।

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