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डीयू की 102वीं दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने छात्रों को शिक्षा और मानवता की अहमियत पर संदेश दिया

डीयू के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छात्रों को दीक्षाएं दीं और बताया कि शिक्षा का असली मतलब मानवता, चरित्र और जिम्मेदारी में है।

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख से अधिक छात्रों को डिग्रियां दी गईं। समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से कहा कि वे देश के भविष्य के निर्माता होंगे और भारतीय वास्तविकताओं के साथ-साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा, “डिग्रियां केवल प्रमाणपत्र हैं, लेकिन असली शिक्षा मानवता, चरित्र और जिम्मेदारी में झलकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा जीवन का अंतिम चरण नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है। वे इस बात पर जोर देते हुए बोले कि ज्ञान प्राप्ति एक निरंतर प्रयास है, जो जीवनभर चलता है।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा की महत्वता पर चर्चा करते हुए कहा कि यह छात्रों को न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें शिक्षा को न केवल एक परीक्षा की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे अपने जीवन के हर पहलू में लागू करना चाहिए।

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इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के वैश्विक रैंकिंग में सुधार की दिशा में कदम उठाने का आह्वान किया। सी.पी. राधाकृष्णन ने शिक्षा संस्थानों से इस दिशा में और प्रयास करने की अपील की ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के भाषण ने छात्रों को प्रेरित किया और शिक्षा के प्रति उनकी सोच को व्यापक दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।

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