दिल्ली में 50 साल से पुरानी इमारतों का होगा सुरक्षा ऑडिट, हर 3, 5 और 10 साल में जांच पर विचार
सत्य निकेतन हादसे के बाद केंद्र 50 साल से पुरानी डीडीए इमारतों के नियमित सुरक्षा ऑडिट पर विचार कर रहा है। तीन, पांच और दस साल के अंतराल सुझाए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक दिन बाद केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की 50 साल से अधिक पुरानी इमारतों का नियमित सुरक्षा ऑडिट कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि प्रस्ताव के तहत पुरानी इमारतों की सुरक्षा जांच केवल किसी शिकायत या हादसे के बाद नहीं, बल्कि नियमित अंतराल पर की जाएगी। इसके लिए 10 साल, पांच साल और तीन साल के अंतराल पर ऑडिट कराने के विकल्प पर विचार हो रहा है। इसका उद्देश्य जर्जर होती इमारतों में संरचनात्मक खामियों का समय रहते पता लगाना है।
खट्टर ने सत्य निकेतन हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को भी अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास रविवार को पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग मलबे में फंस गए थे। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत का इस्तेमाल लड़कों के पेइंग गेस्ट आवास के रूप में किया जा रहा था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में पानी जमा होने और मरम्मत कार्य को इमारत गिरने के संभावित कारणों के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है। घटना के बाद एमसीडी ने दक्षिणी क्षेत्र के उपायुक्त और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। पुलिस ने इमारत के मालिक को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया है।
खट्टर ने भविष्य में डीडीए द्वारा बनाई जाने वाली इमारतों के लिए भी योजना बताई। प्रस्ताव के मुताबिक, किसी इमारत के 50 साल पूरे होने के बाद उसका सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार एक पुनर्विकास कोष बनाने पर भी विचार कर रही है। यह वार्षिक रखरखाव कोष की तरह होगा, जिसमें संबंधित पक्ष योगदान देंगे। इस राशि का इस्तेमाल इमारतों के बेहद जर्जर होने से पहले उनके पुनर्निर्माण की योजना बनाने में किया जा सकेगा।
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली की पुरानी इमारतों, खासकर छात्र आवास और पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही संपत्तियों की संरचनात्मक सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े किए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य इमारत के निर्माण से लेकर रखरखाव, सुरक्षा जांच और पुनर्विकास तक पूरे जीवनचक्र की निगरानी करना है।
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