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दिल्ली की अदालत ने यासीन मलिक समेत सात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया

दिल्ली की विशेष अदालत ने यासीन मलिक और छह अन्य के खिलाफ धनशोधन मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया। ईडी ने हवाला के जरिए विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया।

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ धनशोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया है। मामला कथित तौर पर हवाला माध्यमों से पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से विदेशी फंड हासिल करने से जुड़ा है।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे सभी आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह पैदा होता है। आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की गई है।

इस मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं जाहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, शबीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल रशीद शेख के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वर्ष 2017 में यह मामला दर्ज किया था। इसकी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी थी। ईडी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर हवाला नेटवर्क और अन्य माध्यमों से पाकिस्तानी प्रतिष्ठान तथा अन्य आतंकवादी संगठनों से धन प्राप्त किया।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल अलगाववाद और अन्य कथित विध्वंसकारी गतिविधियों से जुड़े विचारों तथा एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया। ईडी के अनुसार, धन को एक जटिल नेटवर्क के जरिए पहुंचाया गया। इसमें नकद कूरियर और ऐसे माध्यम शामिल थे, जो नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग से धन एकत्र कर हुर्रियत नेतृत्व तक पहुंचाते थे।

ईडी ने आरोप लगाया कि इस धनराशि का इस्तेमाल कथित तौर पर यासीन मलिक सहित हुर्रियत नेतृत्व से जुड़े लोगों द्वारा विध्वंसकारी गतिविधियों और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के उद्देश्य से किया गया।

वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी के अनुसार, मामले से जुड़े निर्धारित अपराधों से कथित तौर पर 8 करोड़ 94 लाख 87 हजार 639 रुपये की अपराध से अर्जित आय बनी। ईडी का दावा है कि आरोपियों ने इस धनराशि को अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त किया, स्थानांतरित किया, छिपाया, अपने कब्जे में रखा, हासिल किया या इस्तेमाल किया।

अदालत के आदेश के बाद मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

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