दिल्ली हाई कोर्ट के वकील 16 जुलाई को भी काम से रहेंगे दूर, आर्थिक अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का विरोध जारी
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने आर्थिक अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के फैसले के विरोध में 16 जुलाई को भी वकीलों के काम से दूर रहने का निर्णय लिया।
दिल्ली हाई कोर्ट के वकील आर्थिक अधिकार क्षेत्र (पेक्यूनियरी जुरिस्डिक्शन) बढ़ाने के मुद्दे को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने फैसला लिया है कि वकील 16 जुलाई को भी न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने बुधवार को हुई आपात बैठक में यह निर्णय लिया। समिति द्वारा पारित प्रस्ताव में 15 जुलाई को वकीलों द्वारा काम से दूर रहने के आह्वान पर सदस्यों के पूर्ण सहयोग और एकजुटता की सराहना की गई।
बार एसोसिएशन ने कहा कि वकीलों ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन का मानना है कि आर्थिक अधिकार क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव से वकीलों और मुकदमों से जुड़े पक्षों पर प्रभाव पड़ सकता है।
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वकीलों का कहना है कि इस मामले में सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर उचित समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि फैसले को लागू करने से पहले इसके व्यावहारिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से अपील की है कि वे विरोध कार्यक्रम में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लें और संगठन के निर्णय का समर्थन करें। एसोसिएशन ने कहा कि वकीलों की एकता ही उनके अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने में मदद करेगी।
गौरतलब है कि आर्थिक अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों में बदलाव का असर यह तय करता है कि किस स्तर की अदालत में कितने मूल्य के दीवानी मामलों की सुनवाई होगी। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने विरोध शुरू किया है।
फिलहाल वकीलों का कार्य बहिष्कार जारी रहने से अदालतों में नियमित सुनवाई प्रभावित हो सकती है। बार एसोसिएशन ने कहा है कि आगे की रणनीति पर फैसला स्थिति और संबंधित अधिकारियों के रुख को देखते हुए लिया जाएगा।