पत्नी के अंतरिम भरण-पोषण की राशि गणितीय सटीकता से तय नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण गणितीय सटीकता से तय नहीं हो सकता और विदेशी मुद्रा में कमाई मात्र से आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण-पोषण तय नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला के अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी राशि को गणितीय सटीकता के साथ तय करना संभव नहीं होता। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने यह भी कहा कि केवल विदेशी मुद्रा में कमाई करना, पत्नी को पति की आय को यांत्रिक रूप से भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार नहीं देता।
अदालत मई 2023 के उस आदेश के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें परिवार न्यायालय ने महिला को ₹50,000 मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था। पत्नी ने इस राशि में वृद्धि की मांग की थी, जबकि पति ने इस आदेश को चुनौती दी थी।
23 दिसंबर को पारित आदेश में अदालत ने कहा, “अंतरिम भरण-पोषण का निर्धारण ऐसा अभ्यास नहीं है जिसे गणितीय सटीकता से किया जा सके।” अदालत ने आगे कहा कि विशेष रूप से उन मामलों में, जहां पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में कार्यरत हो और उसने अपनी आय का पूर्ण और स्पष्ट खुलासा न किया हो, वहां आकलन में अनुमान और विवेकपूर्ण अंदाजे की भूमिका होती है।
और पढ़ें: यमुना खादर क्षेत्र पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, मार्च 2026 के बाद DMRC को उपयोग से रोका
हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम चरण में वह किसी विस्तृत या अंतिम जांच में नहीं जा सकती और उपलब्ध सामग्री, परिस्थितियों, जीवनशैली के संकेतकों तथा कमाने वाले जीवनसाथी की स्वीकृत आय क्षमता के आधार पर एक उचित राशि तय करनी होती है।
अदालत ने यह भी माना कि पति अमेज़न डॉट कॉम सर्विसेज एलएलसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है और अमेरिका में रह रहा है, जबकि पत्नी बेरोजगार है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति की पूरी विदेशी आय को भरण-पोषण की राशि के रूप में समानुपातिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि अमेरिका में जीवन-यापन की लागत दिल्ली से अलग है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति माह कर दी।
और पढ़ें: उन्नाव बलात्कार मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक लगाई, जमानत मंजूर