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दिल्ली हाईकोर्ट ने अकासा एयर के खिलाफ 1.08 करोड़ रुपये का डिक्री आदेश रोका, फैसले में एआई इस्तेमाल पर जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने अकासा एयर के खिलाफ 1.08 करोड़ रुपये के डिक्री आदेश पर रोक लगाई। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में एआई उपयोग की संभावना पर चिंता जताई।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एयरलाइन कंपनी अकासा एयर के खिलाफ दिए गए 1.08 करोड़ रुपये के डिक्री आदेश पर रोक लगा दी है। यह मामला एक निचली अदालत के फैसले से जुड़ा है, जिस पर अब उच्च न्यायालय ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने 30 अप्रैल को पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से ऐसे प्रतीत होते हैं जो संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा तैयार किए गए हो सकते हैं।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी न्यायिक निर्णय में एआई का उपयोग किया गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह से मानव विवेक और कानूनी विश्लेषण पर आधारित होनी चाहिए।

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यह मामला तब सामने आया जब अकासा एयर के खिलाफ एक दीवानी विवाद में निचली अदालत ने 1.08 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि निर्णय के कुछ हिस्सों की भाषा और संरचना में ऐसी समानता है जो एआई-जनित सामग्री जैसी प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

अदालत ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और मानवीय हस्तक्षेप आवश्यक है, और तकनीक का उपयोग सीमित व नियंत्रित रूप में ही होना चाहिए।

यह मामला अब न्यायिक फैसलों में एआई के उपयोग और उसकी सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।

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