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दिल्ली हाई कोर्ट को मिले सात नए जज, कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हुई

दिल्ली हाई कोर्ट में सात नए न्यायाधीशों ने सोमवार को शपथ ली। नियुक्तियों के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 50 हो गई, जबकि अदालत की स्वीकृत क्षमता 60 न्यायाधीशों की है।

दिल्ली हाई कोर्ट को सोमवार को सात नए न्यायाधीश मिले। दिल्ली की अधीनस्थ अदालतों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों ने सोमवार को पद की शपथ ली। इन नियुक्तियों के बाद हाई कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है।

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय नए न्यायाधीशों को सुबह 10 बजे हाई कोर्ट परिसर में आयोजित समारोह में पद की शपथ दिलाएंगे।

शपथ लेने वाले सात न्यायिक अधिकारियों में निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं। सभी अधिकारी अब तक दिल्ली की जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे थे।

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इन न्यायिक अधिकारियों को हाई कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी। केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश के बाद 19 सितंबर को उनकी नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की।

दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 60 स्वीकृत पद हैं। इनमें 45 स्थायी और 15 अतिरिक्त न्यायाधीशों के पद शामिल हैं। सात नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत क्षमता के और करीब पहुंच गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई थी। इससे पहले दिल्ली पर लाहौर हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र था, जिसे 1947 के विभाजन तक जारी रखा गया। बाद में दिल्ली के मामलों के लिए पंजाब हाई कोर्ट की सर्किट बेंच भी स्थापित की गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना के समय इसमें केवल चार न्यायाधीश थे। इनमें मुख्य न्यायाधीश के. एस. हेगड़े तथा न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ, एच. आर. खन्ना और एस. के. कपूर शामिल थे।

शुरुआती वर्षों में हाई कोर्ट हिमाचल प्रदेश से जुड़े मामलों की भी सुनवाई करता था। 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्य बनने के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो गई। समय के साथ हाई कोर्ट की स्वीकृत न्यायिक क्षमता बढ़ती गई और अब सात नई नियुक्तियों से इसकी कार्यरत संख्या 50 हो गई है।

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