दिल्ली होटल अग्निकांड के बाद होटल लाइसेंस और फायर सेफ्टी नियमों पर बढ़ा फोकस
मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली में होटल लाइसेंस और फायर सुरक्षा नियमों पर ध्यान बढ़ा है। सरकार ने बिना फायर एनओसी वाले होटलों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुई भीषण आग की घटना में 21 लोगों की मौत के बाद राजधानी में होटल संचालन से जुड़े नियमों और फायर सेफ्टी मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि जांच एजेंसियां सुरक्षा मानकों में हुई कथित लापरवाही की पड़ताल कर रही हैं।
दिल्ली में किसी भी होटल को संचालित करने के लिए कई अनिवार्य नियमों का पालन करना होता है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 12 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इसके अलावा, होटल की सीढ़ियों और गलियारों की न्यूनतम चौड़ाई 1.5 मीटर होनी चाहिए तथा भवन तक पहुंचने वाली सड़क कम से कम 9 मीटर चौड़ी होनी चाहिए।
फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त करने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। निर्माण शुरू होने से पहले भवन की योजना दिल्ली फायर सर्विस को भेजी जाती है। विभाग द्वारा फायर सुरक्षा मानकों की जांच के बाद मंजूरी दी जाती है। निर्माण पूरा होने के बाद अधिकारियों द्वारा भवन का भौतिक निरीक्षण किया जाता है। सभी अग्नि सुरक्षा और जीवन रक्षक प्रणालियों की जांच के बाद ही फायर एनओसी जारी की जाती है।
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नियमों के अनुसार, 12 मीटर से अधिक ऊंचे या ग्राउंड प्लस तीन मंजिल वाले होटल एवं गेस्ट हाउसों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। इसी प्रकार स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य संस्थानों के लिए भी अलग-अलग सुरक्षा मानदंड निर्धारित हैं।
मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध फायर एनओसी संचालित हो रहे होटलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे प्रतिष्ठानों को सील करने और उनके लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
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