दिल्ली शराब नीति मामले में न्यायमूर्ति मनोज जैन अब सुनेंगे CBI की अर्जी, अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपी
दिल्ली शराब नीति मामले में CBI की चुनौती अब न्यायमूर्ति मनोज जैन के समक्ष सुनवाई के लिए होगी। पूर्व न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने स्वयं को हटाया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय में आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों से जुड़े दिल्ली शराब नीति मामले में अब सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज जैन करेंगे। यह बदलाव तब आया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य आरोपियों को दिए गए राहत आदेश (discharge) को चुनौती दी।
पहले यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष चल रहा था। उन्होंने खुद को इस मामले से हटा (recuse) दिया, क्योंकि केजरीवाल और अन्य लोगों के खिलाफ अलग घटनाओं से जुड़े आपराधिक अवमानना (criminal contempt) मामलों की सुनवाई चल रही थी। उनके हटने के बाद यह मामला न्यायमूर्ति मनोज जैन के समक्ष मंगलवार, 19 मई को सूचीबद्ध किया गया। आम आदमी पार्टी ने इसे बड़ी कानूनी ‘जीत’ बताया।
CBI ने सुनवाई जारी रखने की वकालत की
CBI ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जिसमें केजरीवाल और अन्य आरोपियों को दिल्ली शराब नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं से मुक्त किया गया था। पहले की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू भी उपस्थित थे, जिन्होंने मामले की न्यायिक समीक्षा जारी रखने का समर्थन किया।
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अलग अवमानना सुनवाई
इस बीच, मामले से संबंधित आपराधिक अवमानना की अलग सुनवाई अब न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींदर डूडेया की डिविजन बेंच के पास सौंपी गई है। उच्च न्यायालय ने पहले सुनवाई में सार्वजनिक टिप्पणियों, सोशल मीडिया पोस्ट और संपादित वीडियो क्लिप्स पर चिंता जताई और कहा कि न्यायिक आदेशों की आलोचना संवैधानिक सीमाओं के भीतर होनी चाहिए।
इस मामले में आगामी सुनवाई से पता चलेगा कि CBI की चुनौती पर न्यायालय क्या निर्णय देता है और केस की दिशा किस ओर बढ़ती है।
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