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सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी प्रदर्शन पर रोक का किया बचाव, जुलाई के हिंसक मार्च का दिया हवाला

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी मार्च की अनुमति रोकने का बचाव किया। हलफनामे में जुलाई की हिंसा, यातायात बाधा, सुरक्षा जोखिम और हिरासत कार्रवाई का हवाला दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मार्च की अनुमति नहीं देने के फैसले का बचाव किया है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा कि यह निर्णय कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए जरूरी था।

हलफनामे में पुलिस ने दावा किया कि सीजेपी के पिछले प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, संपत्ति को नुकसान और लोगों के घायल होने की घटनाएं हुई थीं। अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाने वाली किसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।

जुलाई के प्रदर्शन का दिया हवाला

दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च को अनधिकृत और गैरकानूनी बताया। पुलिस का आरोप है कि उस प्रदर्शन में गैरकानूनी जमावड़ा हुआ और पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए। हलफनामे के मुताबिक, इस दौरान 240 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए थे। अपने दावों के समर्थन में पुलिस ने तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री का उल्लेख किया।

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पहले दिए गए आश्वासनों के उल्लंघन का आरोप

पुलिस ने जून में सीजेपी की ओर से दिए गए कथित लिखित आश्वासनों का भी जिक्र किया। उसके अनुसार, संगठन ने प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने, प्रतिभागियों की संख्या 1,000 तक सीमित रखने और अनुमति के बिना संसद की ओर मार्च नहीं निकालने की बात कही थी। पुलिस का आरोप है कि बाद में इन शर्तों का उल्लंघन किया गया।

हलफनामे में 6, 7 और 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों का भी उल्लेख है। पुलिस के मुताबिक, इन मार्चों से मध्य दिल्ली में कई घंटों तक यातायात बाधित हुआ। इससे विद्यार्थियों और यात्रियों को परेशानी हुई तथा कुछ लोगों की ट्रेनें और उड़ानें छूट गईं। पुलिस ने महिला कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी आरोप लगाया।

हिरासत में लेने की कार्रवाई का बचाव

पुलिस आयुक्त ने कहा कि 10 अक्टूबर के मार्च से पहले संभावित हिंसा और सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया गया था। संसद, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और राजनयिक मिशनों की मौजूदगी के कारण राजधानी को संवेदनशील क्षेत्र बताया गया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई का भी बचाव किया। हलफनामे के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 और दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का दावा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटों में छोड़ दिया गया, भोजन दिया गया और उन्हें जेल या लॉकअप में नहीं रखा गया।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उसकी जिम्मेदारी है। हलफनामे में लगाए गए आरोप पुलिस का पक्ष हैं।

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