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दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी हादसे की जांच में बड़ा खुलासा, ऑपरेटर की भूमिका और दीवार तोड़ने पर फोकस

दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी हादसे की जांच में ऑपरेटर सुधांशु की भूमिका, साझेदार शुभम त्यागी के फरार होने और दीवार तोड़ने से जुड़े अहम तथ्य सामने आए हैं।

दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पुराने पीजी भवन के ढहने से सात लोगों की मौत के मामले की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, हादसे के समय पीजी संचालक सुधांशु घटनास्थल से महज 100 मीटर दूर अपने कार्यालय में मौजूद था। घटना की जानकारी मिलने के बावजूद वह कथित तौर पर मौके पर नहीं गया। उसने कुछ फोन कॉल किए और फिर वहां से चला गया। पुलिस उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, सुधांशु को आशंका थी कि स्थानीय लोग हादसे के बाद उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। उसका कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में कई पुलिस टीमें लगाई गई हैं।

दिल्ली के भजनपुरा निवासी सुधांशु वर्ष 2022 से अपने दोस्त शुभम के साथ पीजी कारोबार चला रहा था। दोनों सत्य निकेतन में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से सात पीजी या आवासीय सुविधाएं संचालित कर रहे थे। हादसे वाली इमारत को उन्होंने अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपये मासिक किराये पर लिया था। पुलिस के मुताबिक, जर्जर स्थिति के कारण इमारत अपेक्षाकृत कम किराये पर मिली थी।

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जांच में अभी तक सामने आया है कि पीजी संचालकों ने भवन में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं किया था। उनका काम मुख्य रूप से दीवारों की पेंटिंग और पुराने एयर कंडीशनर, बेड, अलमारी तथा टेबल लगाने तक सीमित था। हालांकि, पुलिस यह जांच कर रही है कि मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों से भवन की मजबूती प्रभावित हुई या नहीं।

पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कासगंज से मजदूर ठेकेदार सनोज कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वह करीब 10 दिनों से मजदूरों के साथ भवन में मरम्मत कर रहा था। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को समान स्तर पर लाने के लिए वहां लगभग तीन ट्रक मलबा डाला गया था।

जांच का सबसे अहम पहलू ग्राउंड फ्लोर की एक दीवार को तोड़ना है। पुलिस के अनुसार, दुकान के लिए जगह बनाने में बाधा बन रही इस दीवार को हादसे वाले दिन कथित तौर पर गिराया गया था। आशंका है कि दीवार हटने के बाद भवन भार सहन नहीं कर सका और पूरी संरचना ढह गई।

हादसे के समय मजदूर दोपहर के भोजन के लिए बाहर गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। पुलिस अब भवन मालिक महेश गुप्ता, ठेकेदार, पीजी संचालकों और मरम्मत कार्यों की भूमिका की जांच कर रही है।

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