दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्पीड कंट्रोल के लिए लेजर स्पीड गन का ट्रायल शुरू किया
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एनएच-44 पर लेजर स्पीड गन का ट्रायल किया। अभियान में 151 चालान काटे गए। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार पर नियंत्रण और सड़क दुर्घटनाएं कम करना है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शहर में तेज रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाते हुए एनएच-44 कॉरिडोर पर हैंडहेल्ड लेजर स्पीड गन का ट्रायल शुरू किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को लिबासपुर बस स्टैंड इलाके में पांच हैंडहेल्ड लेजर स्पीड कैमरों का परीक्षण किया गया। इस अभियान के दौरान तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 151 चालान भी जारी किए गए।
लिबासपुर बस स्टैंड क्षेत्र औद्योगिक इलाका है, जहां भारी संख्या में ट्रक और वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही रहती है। इस वजह से यहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या भी काफी अधिक रही है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच लिबासपुर क्षेत्र में कुल 68 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 28 हादसे घातक साबित हुए।
पुलिस का कहना है कि नए लेजर उपकरणों की मदद से निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज चलने वाले वाहनों की सटीक पहचान की जा सकेगी। इससे औद्योगिक और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा। अधिकारियों के मुताबिक, तेज रफ्तार और खराब लेन अनुशासन एनएच-44 जैसे दुर्घटना संभावित मार्गों पर हादसों की बड़ी वजह हैं।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लक्षित स्पीड नियंत्रण अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ मिलकर सड़क हादसों में कमी लाने में मदद करेंगे।
ये लेजर स्पीड कैमरे ग्लोबल रोड सेफ्टी पार्टनरशिप (GRSP) द्वारा ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल रोड सेफ्टी (BIGRS) के तहत दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। जीआरएसपी एशिया पैसिफिक मैनेजर ने कहा कि प्रभावी स्पीड नियंत्रण सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ सहयोग जारी रहेगा।
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