स्वैच्छिक शुल्क भुगतान के लिए अब भौतिक चालान की जरूरत नहीं
डीजीएफटी ने निर्यातकों के लिए स्वैच्छिक शुल्क भुगतान पर भौतिक चालान जमा करने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इससे प्रक्रिया तेज होगी और अनुपालन का बोझ घटेगा।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए निर्यात दायित्व निर्वहन प्रमाणपत्र (ईओडीसी) के लिए भौतिक शुल्क भुगतान चालान जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। यह सुविधा अग्रिम प्राधिकरण (एए) और निर्यात प्रोत्साहन पूंजीगत वस्तु (ईपीसीजी) योजनाओं के तहत लागू होगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि इस महीने की पहली तारीख या उसके बाद किए गए स्वैच्छिक शुल्क भुगतान के लिए निर्यातकों को अब प्राधिकरण बंद करने के आवेदन के साथ भौतिक चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और अनावश्यक पत्राचार में कमी आएगी।
मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था डीजीएफटी के विभिन्न क्षेत्रीय प्राधिकरणों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक एकरूपता लाने में भी मदद करेगी। अब मैनुअल तरीके से दस्तावेज जमा करने और उनके सत्यापन के बजाय प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा।
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सरकार ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड आधारित व्यवस्था से प्रसंस्करण में लगने वाला समय कम होगा और आंकड़ों की सटीकता बेहतर होगी। इसके साथ ही मानवीय हस्तक्षेप में कमी आने से पारदर्शिता बढ़ेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
इस बदलाव से निर्यातकों की लेनदेन लागत और अनुपालन संबंधी बोझ भी कम होने की उम्मीद है। खासतौर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें दस्तावेज तैयार करने, बार-बार विभागीय संपर्क करने और कार्यालयों में भौतिक रूप से उपस्थित होने की जरूरत कम होगी।
डीजीएफटी के इस फैसले को व्यापार सुगमता और निर्यात प्रक्रिया के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर है, जिनसे निर्यातकों को कम कागजी कार्रवाई के साथ तेजी से सेवाएं मिल सकें और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी एवं कुशल बनें।
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