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कावेरी विवाद पर डी. के. शिवकुमार की अपील, कर्नाटक बंद वापस लेने को कहा; बोले- राज्य के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कन्नड़ समर्थक संगठनों से 13 अगस्त का कर्नाटक बंद वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य और किसानों के हितों की रक्षा करेगी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद को लेकर 13 अगस्त को प्रस्तावित राज्यव्यापी बंद वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा बंद से किसी का भला नहीं होगा।

कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) द्वारा कावेरी जल विनियमन समिति की उस सिफारिश को बरकरार रखने के विरोध में बंद का आह्वान किया है, जिसमें तमिलनाडु को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की बात कही गई है।

बेंगलुरु में कावेरी मुद्दे पर आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक सामान्य से केवल 30 से 35 प्रतिशत वर्षा हुई है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने किसानों से धैर्य बनाए रखने और नए दिशा-निर्देश जारी होने तक सहयोग करने की अपील की।

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शिवकुमार ने बताया कि कबिनी बांध में 24,000 क्यूसेक और कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध में 22,000 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। उन्होंने कहा कि केआरएस बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को वहां से पानी छोड़ा गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने सरकार के फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने भी केआरएस बांध का दौरा कर हालात को समझा है। उन्होंने कहा कि वह सभी कन्नड़ संगठनों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे और बंद वापस लेने का अनुरोध करेंगे।

शिवकुमार ने यह भी बताया कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से बेंगलुरु के प्रस्तावित दौरे को स्थगित करने का अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और संबंधित नियामक संस्थाएं पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और कानून का सम्मान करना राज्य का दायित्व है। उन्होंने दोहराया कि तमिलनाडु को 177 टीएमसी पानी उपलब्ध कराना कानूनी जिम्मेदारी है, लेकिन साथ ही राज्य सरकार किसानों और कर्नाटक के लोगों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।

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