यह लोकतंत्र है, हिटलर का शासन नहीं: डी. के. शिवकुमार ने संविधान संशोधन बिल पर केंद्र को घेरा
डी. के. शिवकुमार ने संविधान संशोधन बिल पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र है, हिटलर का शासन नहीं। उन्होंने विपक्ष से चर्चा न करने पर आपत्ति जताई।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को लोकसभा में पेश करने से पहले विपक्ष से पर्याप्त चर्चा न करने पर आपत्ति जताई।
शिवकुमार ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह लोकतंत्र है, हिटलर का शासन नहीं,” जिससे उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति बेहद जरूरी है, खासकर जब मामला संविधान से जुड़ा हो।
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शिवकुमार ने यह भी कहा कि विपक्ष की राय को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उनके अनुसार, सरकार को ऐसे मुद्दों पर पारदर्शिता और सहयोग का रवैया अपनाना चाहिए ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और विपक्ष लगातार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा सकते हैं, खासकर संवैधानिक मुद्दों पर।
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