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राज्यपाल के परंपरागत अभिभाषण की प्रथा खत्म करने के लिए संविधान संशोधन का समर्थन करेगी डीएमके: सीएम स्टालिन

सीएम एम.के. स्टालिन ने कहा कि डीएमके राज्यपाल के परंपरागत अभिभाषण की प्रथा खत्म करने के लिए संविधान संशोधन की वकालत करेगी, विधानसभा ने राज्यपाल की कार्रवाई के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को कहा कि डीएमके देश की समान विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर संविधान में संशोधन की वकालत करेगी, ताकि विधानसभा के वर्ष के पहले सत्र की शुरुआत राज्यपाल के परंपरागत अभिभाषण से कराने की प्रथा को समाप्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकार की भूमिका सर्वोपरि होती है और ऐसी परंपराएं, जो जनादेश के विपरीत टकराव पैदा करें, उन पर पुनर्विचार होना चाहिए।

इससे पहले तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे मुख्यमंत्री स्टालिन ने पेश किया था। इस प्रस्ताव में राज्यपाल द्वारा सदन में अपना परंपरागत अभिभाषण न पढ़ने की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया गया। प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया कि जो भाषण राज्यपाल को भेजा गया था और जिसे विधायकों को दिए गए टैबलेट में अपलोड किया गया था, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा।

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स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहनी चाहिए और निर्वाचित सरकार के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राज्यपाल की कार्रवाइयों से अनावश्यक राजनीतिक गतिरोध पैदा होता है, जो संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि डीएमके इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी और अन्य दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी। उनका कहना है कि यदि संविधान में संशोधन कर इस प्रथा को बदला जाता है, तो इससे राज्यों और राजभवन के बीच टकराव कम होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक मजबूत बनेगी।

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