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महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन परिसीमन पर स्पष्टता जरूरी: डीएमके ने केंद्र से मांगा रोडमैप

डीएमके ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए केंद्र से परिसीमन पर स्पष्ट रोडमैप मांगा। पार्टी ने कहा कि दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर स्पष्टता की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन इसे भविष्य के परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।

यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में डीएमके के राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने उठाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण मौजूदा लोकसभा की सीटों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए, न कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद।

तिरुचि शिवा ने कहा, "डीएमके महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को अधिक स्पष्टता देनी चाहिए। यदि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है, तो इस प्रक्रिया को 25 वर्षों के लिए स्थगित किया जाना चाहिए।"

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इससे पहले डीएमके ने एक प्रस्ताव पारित कर वर्तमान स्वरूप में परिसीमन विधेयक का विरोध जारी रखने का फैसला किया था। पार्टी ने कहा कि नए विधेयक का मसौदा आने के बाद उसकी सिफारिशों के आधार पर आगे का रुख तय किया जाएगा।

कांग्रेस ने भी परिसीमन विधेयक का विरोध करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की एकजुटता बनाए रखने का प्रयास करेगी। साथ ही सांसदों, विधायकों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के कार्यकाल को एक साथ कराने से जुड़े प्रस्तावित विधेयक का भी विरोध करेगी।

गौरतलब है कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जो महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा था, 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे।

केंद्र सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आएगी। हालांकि विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है और सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहा है।

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें इस मुद्दे पर जोरदार बहस होने की संभावना है।

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