सुदर्शन चक्र वायु रक्षा पहल में डीआरडीओ निभाएगा अहम भूमिका: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुदर्शन चक्र वायु रक्षा पहल में डीआरडीओ प्रमुख भूमिका निभाएगा और अगले दशक में देशभर में अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणालियां तैनात की जाएंगी।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (1 जनवरी, 2026) को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ‘सुदर्शन चक्र’ नामक महत्वाकांक्षी वायु रक्षा पहल के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। इस पहल की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान की थी।
राजनाथ सिंह ने बताया कि सुदर्शन चक्र पहल के तहत देशभर में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ढांचों को अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों से लैस किया जाएगा। इसका उद्देश्य अगले एक दशक में भारत को समग्र और बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा कवच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और उभरती चुनौतियों को देखते हुए देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, डीआरडीओ स्वदेशी तकनीकों के विकास और तैनाती में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इसमें उन्नत रडार प्रणाली, मिसाइल अवरोधन तकनीक, ड्रोन-रोधी प्रणालियां और एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क शामिल होंगे। सुदर्शन चक्र को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वह पारंपरिक विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य उभरते हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपट सके।
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राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, क्योंकि इसमें स्वदेशी अनुसंधान, विकास और उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने पहले भी कई जटिल रक्षा प्रणालियों को सफलतापूर्वक विकसित किया है और सुदर्शन चक्र परियोजना में भी वह अपनी क्षमता साबित करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस वायु रक्षा पहल से न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में नवाचार, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
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