डीआरडीओ का नेत्रा एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम 25 जून को मिलेगा अंतिम ऑपरेशनल क्लियरेंस
डीआरडीओ के ‘नेत्रा’ एयरबोर्न सिस्टम को 25 जून को अंतिम ऑपरेशनल मंजूरी मिल सकती है। यह भारत की वायु रक्षा और निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाएगा।
भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित ‘नेत्रा’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यूएंडसी) को 25 जून को अंतिम ऑपरेशनल क्लियरेंस मिलने की संभावना है। यह भारत की वायु सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास ‘नेत्रा’ सिस्टम के साथ-साथ आईएल-76 विमान पर आधारित फाल्कन एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) भी मौजूद है। फाल्कन सिस्टम, जिसे उन्नत इंजन वाले आईएल-76 विमानों पर लगाया गया है, अत्याधुनिक रडार तकनीक से लैस है, जो हवा में और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम है।
डीआरडीओ का ‘नेत्रा’ सिस्टम स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसे विशेष रूप से निगरानी, कमांड और कंट्रोल क्षमता को बढ़ाने के लिए विकसित किया गया है। यह सिस्टम भारतीय वायुसेना को दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों का पहले से पता लगाने और समय पर प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा।
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रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘नेत्रा’ प्रणाली का अंतिम ऑपरेशनल क्लियरेंस मिलना भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न केवल भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी।
भारत पहले से ही सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ऐसे में ‘नेत्रा’ सिस्टम का शामिल होना वायुसेना की रणनीतिक तैयारी को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
इस प्रणाली के शामिल होने से भारत की एयर डिफेंस नेटवर्क को रियल-टाइम निगरानी और तेज निर्णय क्षमता का लाभ मिलेगा, जिससे किसी भी संभावित खतरे का समय रहते मुकाबला किया जा सकेगा।
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