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भारत को हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में बड़ी सफलता, DRDO ने स्क्रैमजेट इंजन का सफल ग्राउंड टेस्ट किया

डीआरडीओ ने हाइपरसोनिक मिसाइल विकास में बड़ी सफलता हासिल की है। स्क्रैमजेट इंजन का 1200 सेकंड का सफल परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक को नई मजबूती देता है।

भारत ने अपनी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के तहत स्क्रैमजेट इंजन का सफल ग्राउंड टेस्ट किया है।

हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल स्केल कंबस्टर का दूसरा विस्तृत और लंबी अवधि का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण शुक्रवार को किया गया, जिसकी जानकारी शनिवार को डीआरडीओ ने दी।

इस परीक्षण के दौरान डीआरडीएल ने अपने अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (SCPT) सुविधा में 1200 सेकंड से अधिक समय तक इंजन को सफलतापूर्वक चलाया। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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इससे पहले जनवरी महीने में भी इसी तरह का परीक्षण किया गया था, जिसमें 12 मिनट से अधिक समय तक रन टाइम हासिल किया गया था। उस परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी देशों की सूची में शामिल कर दिया था।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस उपलब्धि में अत्याधुनिक सुपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग इंजन, स्वदेशी लिक्विड हाइड्रोकार्बन एंडोथर्मिक ईंधन, हाई टेम्परेचर थर्मल बैरियर कोटिंग और उन्नत निर्माण तकनीक का उपयोग किया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने इस सफलता पर वैज्ञानिक टीम को बधाई दी है।

इसी बीच, डीआरडीओ ने अग्नि-5 मिसाइल के मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) सिस्टम का भी सफल परीक्षण किया है, जो भारत की सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करता है।

यह उपलब्धियां भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और तकनीकी शक्ति को नई ऊंचाई पर ले जाती हैं।

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