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नशे की लत न तो अच्छी है, न ही आज़ादी की निशानी, बिना डर मदद लें: शिक्षा मंत्री

दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त अभियान के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नशे की लत अच्छी नहीं है और छात्रों से बिना डर मदद लेने की अपील की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि नशे की लत न तो “अच्छी” है और न ही यह आज़ादी या विद्रोह का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नशे को स्वतंत्रता से जोड़ने की गलत धारणा में न पड़ें। यह बात उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में नशा विरोधी पहल के तहत आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

यह अवसर दिल्ली विश्वविद्यालय के “ड्रग-फ्री कैंपस अभियान” के शुभारंभ का था, जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस पहल का उद्देश्य युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या से निपटना और दिल्ली विश्वविद्यालय को नशामुक्त परिसर के रूप में राष्ट्रीय मॉडल बनाना है।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ डीयू स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। इस दौरान एक विशेष “ड्रग-फ्री कैंपस” पोर्टल और मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया। कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को नशा विरोधी शपथ दिलाई, जिससे विश्वविद्यालय की जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित किया गया।

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अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक केंद्र नहीं होते, बल्कि यहां मूल्यों का निर्माण होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नशे का कारोबार नार्को-आतंकवाद को बढ़ावा देता है और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तभी संभव है जब देश का युवा वर्ग स्वस्थ और नशामुक्त हो।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नशे के व्यक्तिगत दुष्परिणामों पर जोर देते हुए कहा कि जिज्ञासा से शुरू होने वाली आदत अक्सर निर्भरता, खराब स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के विनाश तक पहुंच जाती है। उन्होंने छात्रों से बिना डर मदद लेने की अपील करते हुए कहा कि मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण भी उनका अहम दायित्व है। उन्होंने राजधानी के स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे अभियानों के विस्तार की बात कही।

कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि यह अभियान केंद्र सरकार के “नशा मुक्त भारत अभियान” के अनुरूप है और दिल्ली विश्वविद्यालय नशामुक्त परिसर बनने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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