दुबई और अबू धाबी: ईरान ने प्रमुख ऊर्जा हब्स को निशाना बनाया, सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई का अधिकार जताया
ईरान ने खाड़ी के प्रमुख ऊर्जा हब्स को निशाना बनाया, कतर और यूएई में नुकसान हुआ, सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई का अधिकार जताया, वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ा।
यूएस, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 20वें दिन में प्रवेश कर गया है और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देशों के प्रमुख तेल और गैस हब्स को निशाना बना रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिससे तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान औद्योगिक शहर पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे व्यापक नुकसान हुआ। इस हमले के बाद कतर ने अपने देश में ईरानी सुरक्षा और सैन्य अटैची को 24 घंटे के भीतर बाहर निकलने का आदेश दिया।
संघर्ष का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखा। संयुक्त अरब अमीरात ने अबू धाबी में हबशान गैस संयंत्रों को बंद कर दिया, जबकि सऊदी अरब ने अपनी दो रिफाइनरियों पर हमलों की पुष्टि की। रियाद ने कहा कि ईरान पर शेष भरोसा पूरी तरह समाप्त हो गया है और देश अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है।
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यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी, साथ ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की भी मौत हुई। अमेरिका और इजराइल का उद्देश्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को कमजोर करना, उसके बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को निष्क्रिय करना और शासन को कमजोर करना बताया गया।
दोनों पक्ष लगातार हमले जारी रखे हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए हालात अत्यधिक अस्थिर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट का दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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