पूर्वी फ्रंटियर राइफल्स को मिलेगा नया जीवन, 1,000 से अधिक गोरखा युवाओं की होगी भर्ती
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्वी फ्रंटियर राइफल्स को पुनर्जीवित करने और 1,000 से अधिक गोरखा युवाओं की भर्ती की घोषणा की है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग में आयोजित एक जनसभा के दौरान ऐतिहासिक पूर्वी फ्रंटियर राइफल्स (ईएफआर) को पुनर्जीवित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में इस बल में 1,000 से अधिक गोरखा युवाओं की भर्ती की जाएगी, जिनमें 30 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने देश की सुरक्षा में गोरखा सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करते हुए कहा कि ईएफआर गोरखा समुदाय की गौरवशाली विरासत का प्रतीक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बल में भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी, जिसके कारण इसकी स्थिति कमजोर हो गई और यह केवल दो बटालियनों तक सीमित रह गया।
पूर्वी फ्रंटियर राइफल्स पश्चिम बंगाल पुलिस के अधीन कार्य करने वाला एक ऐतिहासिक सशस्त्र पुलिस बल है। इसका गोरखा समुदाय से गहरा संबंध रहा है। यह बल आंतरिक सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियानों और सीमाई सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ईएफआर के जवानों ने दोनों विश्व युद्धों तथा 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी उल्लेखनीय योगदान दिया था।
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उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ईएफआर केवल एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय की पहचान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस बल ने वर्षों तक हजारों गोरखा परिवारों को रोजगार और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान की।
भारतीय जनता पार्टी के दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लंबे समय से उपेक्षित बल के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2010 के बाद से ईएफआर में नई भर्ती नहीं हुई, जबकि हजारों पद खाली पड़े थे।
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