बंगाल में 54 लाख वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना मौका दिए हटाए गए: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में एसआईआर के दौरान 54 लाख वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना कारण बताए हटाए गए और अब एक करोड़ और नाम हटाने की साजिश है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची के मसौदे से 54 लाख नाम एकतरफा तरीके से हटा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि इनमें से अधिकांश नाम “वास्तविक और वैध मतदाताओं” के थे, जिन्हें न तो हटाए जाने के कारण बताए गए और न ही खुद का पक्ष रखने का कोई अवसर दिया गया।
राज्य सचिवालय नबान्ना में आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) की शक्तियों का दुरुपयोग कर यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने दिल्ली में बैठकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का इस्तेमाल किया, जिनके जरिए नामों में कथित “असंगतियों” के आधार पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इन एआई सॉफ्टवेयर के कारण कई महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, क्योंकि शादी के बाद उनके उपनाम बदल गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” यानी तार्किक असंगति का आधार मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसे बाद में जोड़ा गया ताकि अधिक से अधिक नाम हटाए जा सकें।
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ममता बनर्जी ने दावा किया कि “बीजेपी-चुनाव आयोग गठजोड़” अब अंतिम मतदाता सूची से एक करोड़ और नाम हटाने की योजना बना रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट) को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं को पर्याप्त संख्या में जुटाने में विफल रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करेगी।
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