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दिल्ली में पहली बार चिन्हित हुए 8 मुश्किल नाले, अतिक्रमण और कचरे के कारण सफाई बनी बड़ी चुनौती

दिल्ली में जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए आठ मुश्किल नालों की पहचान हुई है। अतिक्रमण, सीवर, कचरा और सीमित पहुंच सफाई में बाधा हैं।

दिल्ली में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या के बीच अधिकारियों ने पहली बार शहर के आठ ऐसे नालों की पहचान की है, जिन्हें साफ करना बेहद मुश्किल माना गया है। इन नालों में अतिक्रमण, सीवर का पानी, कचरा और गोबर डाले जाने के कारण सफाई और जल निकासी प्रभावित होती है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की सेवा योजना रिपोर्ट में इन नालों को ‘मुश्किल नाले’ बताया गया है।

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में भी इन समस्याओं और उनके समाधान पर जोर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक नगर निगम दिल्ली, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच रखरखाव की जिम्मेदारी भी चुनौती बनी हुई है।

आठ मुश्किल नालों में क्या समस्याएं हैं?

एस्केप ड्रेन नंबर-1 में पानी की दो पाइपलाइन जल प्रवाह रोक रही हैं। जल उपचार संयंत्र से आने वाली गाद और सफाई मशीनों के लिए जगह की कमी भी समस्या है। पाइपलाइन हटाकर नाले की गाद निकालने का सुझाव दिया गया है।

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बिहारीपुर नाले के दोनों ओर घनी आबादी है। मशीनों की पहुंच मुश्किल होने के साथ कचरा और गोबर भी नाले में डाला जाता है। सफाई के लिए समानांतर सड़क और जरूरत पड़ने पर अवैध निर्माण हटाने का प्रस्ताव है।

बंद नाले में भी घरों की वजह से सफाई के लिए जगह नहीं है। कचरा और गोबर समस्या बढ़ाते हैं। यहां अवरोध हटाने और समानांतर सड़क बनाने की योजना है।

किराड़ी सुलेमान नगर नाले में 106 अवैध और बिना सीवर वाली कॉलोनियों का घरेलू कचरा, सीवर और अन्य अपशिष्ट पहुंचता है। यहां सीवर का मार्ग बदलने और तीन पुलियों को हटाकर ह्यूम पाइप लगाने का प्रस्ताव है।

पंखा रोड नाले में कचरा, अतिक्रमण और ऊपर से गुजरती हाईटेंशन बिजली लाइनें चुनौती हैं। दोनों ओर कंक्रीट की दीवार बनाने की सिफारिश की गई है।

रिलीफ नाले में सफाई मशीनों के लिए जगह नहीं है। नासिरपुर और असोला नालों में भी कचरा फेंकना बड़ी समस्या है। इनके पास उचित कचरा संग्रह केंद्र बनाने और नालों के ऊपर स्टील जाल लगाने का सुझाव दिया गया है।

इन उपायों का उद्देश्य नालों की जल निकासी क्षमता बहाल करना और भारी बारिश से पहले नियमित सफाई सुनिश्चित करना है।

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