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बिग टेक पर टैक्स लगाने की मांग, यूरोपीय संघ के बजट को लेकर बढ़े मतभेद

यूरोपीय संघ के सांसदों ने बड़े टेक कंपनियों और ऑनलाइन जुआ साइट्स पर टैक्स लगाने की मांग की है, ताकि 2028-2034 बजट के लिए अतिरिक्त फंड जुटाया जा सके।

यूरोपीय संघ (ईयू) में बजट को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आ रहा है, जहां सांसदों ने दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों और ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म्स पर टैक्स लगाने की मांग की है। इस कदम का उद्देश्य 27 देशों के इस समूह के आगामी सात वर्षीय बजट के लिए अतिरिक्त धन जुटाना है।

ईयू के विधायकों ने प्रस्ताव रखा कि पूरे यूरोपीय संघ में एक समान टैक्स प्रणाली लागू की जाए, जिससे बड़ी टेक कंपनियों से राजस्व प्राप्त किया जा सके। यह प्रस्ताव खास तौर पर 2028 से 2034 के बजट को ध्यान में रखते हुए लाया गया है, जिसका आकार करीब दो ट्रिलियन यूरो (लगभग 2.3 ट्रिलियन डॉलर) तय किया गया है।

हालांकि, इस मुद्दे पर यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच कड़ी बातचीत होने की संभावना है। कई सदस्य देश अपने स्तर पर अतिरिक्त वित्तीय योगदान देने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे नए राजस्व स्रोतों की तलाश जरूरी हो गई है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी से विस्तार कर रही बड़ी टेक कंपनियों को भी कर के दायरे में लाना चाहिए, ताकि वे सार्वजनिक खर्च में योगदान दे सकें।

ईयू के भीतर बजट को लेकर यह बहस इस साल की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों में से एक मानी जा रही है। आने वाले समय में इस पर गहन चर्चा और सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।

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