मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास को लेकर फर्जी तस्वीरें वायरल, आठ एफआईआर दर्ज
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी एआई तस्वीरें वायरल करने के आरोप में आठ एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस ने इसे धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास बताया।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर फर्जी और भ्रामक तस्वीरें फैलाने के मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आठ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह कार्रवाई उन लोगों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के कुछ हैंडल्स के खिलाफ की गई है, जिन्होंने एआई-जनरेटेड तस्वीरें और गलत जानकारी साझा की।
वाराणसी के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसल ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को बताया कि आठ व्यक्तियों और कुछ एक्स हैंडल्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें और सामग्री मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य से जुड़े वास्तविक तथ्यों के विपरीत थीं।
अधिकारियों का आरोप है कि कुछ पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी तस्वीरों को जानबूझकर इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे, लोगों में भ्रम फैले और सामाजिक सौहार्द बिगड़े। पुलिस का कहना है कि इस सामग्री का उद्देश्य जनता में नाराजगी और तनाव पैदा करना था।
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इस संबंध में चौक थाने में तमिलनाडु निवासी मनो नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी कंपनी 15 नवंबर 2025 से मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने और घाट के सौंदर्यीकरण का कार्य कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 16 जनवरी की रात एक एक्स हैंडल उपयोगकर्ता ने एआई-जनरेटेड और भ्रामक तस्वीरें साझा कीं, जिनमें तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। इन पोस्ट्स से हिंदू श्रद्धालुओं को गुमराह किया गया और समाज में असंतोष फैलने लगा। बाद में इन पोस्ट्स पर बड़ी संख्या में आपत्तिजनक टिप्पणियां और रीपोस्ट हुए, जिससे तनाव और बढ़ गया।
डीसीपी गौरव बंसल ने कहा कि इस मामले में न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने की कोशिश की गई, बल्कि समाज में सरकार विरोधी मानसिकता पैदा करने का भी प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ मूल पोस्ट करने वालों, बल्कि उन्हें साझा करने और टिप्पणी करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सोशल मीडिया पर अफवाहें और गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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