महापंचायत के लिए दिल्ली कूच, शंभू बॉर्डर फिर बंद; भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का बड़ा प्रदर्शन
दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत के लिए किसान रवाना हुए। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में शंभू बॉर्डर बंद किया गया और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
दिल्ली में मंगलवार को आयोजित होने वाली किसानों की महापंचायत के मद्देनज़र शंभू बॉर्डर को एक बार फिर बंद कर दिया गया है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सड़क पर सीमेंट के स्लैब लगाकर आवागमन रोक दिया है।
दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली इस महापंचायत का आयोजन देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले किया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि देशभर के लगभग 550 किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि इस महापंचायत में शामिल होंगे। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करना है।
किसान मजदूर संघर्ष समिति, पंजाब के नेता गुरमनजीत सिंह बंडाला ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय किसानों, खेत मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता के हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी कंपनियों और किसानों को लाभ मिलेगा, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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बंडाला ने कहा कि यदि प्रशासन किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकता है तो वे जहां रोके जाएंगे, वहीं शांतिपूर्ण धरना देकर अपने आंदोलन को जारी रखेंगे और लोगों को इस समझौते के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार प्रस्तावित व्यापार समझौते को वापस नहीं लेती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
वहीं किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान इस महापंचायत में भाग लेने दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित समझौता केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है।
किसानों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल रद्द किया जाए और देश के किसानों, कृषि अर्थव्यवस्था तथा आम नागरिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। पंजाब के कई किसान संगठन पहले भी इस समझौते के विरोध में मोटरसाइकिल रैलियां निकाल चुके हैं।
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