पत्नी पर आर्थिक प्रभुत्व को क्रूरता नहीं मान सकती, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति का पत्नी पर वित्तीय प्रभुत्व क्रूरता नहीं है, जब तक मानसिक या शारीरिक नुकसान न हुआ हो; दहेज उत्पीड़न का मामला खारिज किया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति द्वारा पत्नी पर वित्तीय या आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करना किसी भी स्थिति में क्रूरता (cruelty) के अंतर्गत नहीं आता, विशेषकर तब जब पत्नी को मानसिक या शारीरिक कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ हो।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की बी.वी. नगरथना की अध्यक्षता वाली बेंच ने दहेज उत्पीड़न के मामले को खारिज करते हुए यह निर्णय दिया। इस मामले में महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया था कि उन्होंने घरेलू खर्चों का एक-एक पैसा पत्नी के लिए एक एक्सेल शीट में दर्ज करने के लिए मजबूर किया, जबकि वह अपने माता-पिता और भाई-बहनों को व्यवसाय संबंधी खर्चों के लिए लाखों रुपये भेजते रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं शादी के “रोजमर्रा के उतार-चढ़ाव” और दैनिक झमेलों का हिस्सा मानी जा सकती हैं और इसे दहेज उत्पीड़न या क्रूरता के तहत नहीं रखा जा सकता।
और पढ़ें: अरावली पहाड़ियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर की विशेषज्ञ रिपोर्ट पर रोक लगाई
कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि आपराधिक मुकदमे व्यक्तिगत विवादों, व्यक्तिगत प्रतिशोध या वैवाहिक कलह का समाधान बनने के लिए इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं और केवल तब कार्रवाई करें जब वास्तविक मानसिक या शारीरिक हानि साबित हो।
इस निर्णय से यह भी स्पष्ट हुआ कि वैवाहिक जीवन में वित्तीय निर्णयों या खर्चों के पैटर्न को लेकर होने वाले विवाद को स्वचालित रूप से दहेज या क्रूरता मानना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पति के पक्ष में फैसला सुनाया और महिला के दहेज उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया।