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सतत विकास में समानता जरूरी: पूर्व CJI गवई ने NALSAR में अंबेडकर स्मृति व्याख्यान में कहा

पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई ने NALSAR में कहा कि सतत विकास तभी सफल है जब उसमें समानता और समावेशी विकास शामिल हो तथा संविधान आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए।

बी आर गवई ने कहा है कि सतत विकास (Sustainable Development) का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब उसमें समानता और समावेशी विकास को केंद्र में रखा जाए। उन्होंने यह बात एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में दिए गए अंबेडकर स्मृति व्याख्यान के दौरान कही।

यह व्याख्यान डॉ भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। पूर्व CJI गवई ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में विकास की अवधारणा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन का समावेश भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि एक मजबूत संवैधानिक दृष्टिकोण ही ऐसा ढांचा प्रदान कर सकता है जिसमें पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास दोनों को साथ लेकर चला जा सके। गवई ने जोर देकर कहा कि यदि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचते, तो वह टिकाऊ नहीं माना जा सकता।

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उन्होंने यह भी कहा कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करता है। इसलिए नीति निर्माण में संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

कार्यक्रम में कानून के छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भी भाग लिया और सतत विकास तथा सामाजिक न्याय के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि पर्यावरणीय चुनौतियों और सामाजिक असमानताओं का समाधान एक साथ खोजा जाना चाहिए।

इस अवसर पर अंबेडकर के विचारों को याद करते हुए कहा गया कि उनका दृष्टिकोण आज भी आधुनिक भारत के विकास मॉडल के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

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