पूर्व CJI गवई ने JPC को बताया: एक साथ चुनाव संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करते
पूर्व CJI बी.आर. गवई ने कहा कि एक साथ चुनाव संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करते। यह केवल चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव है और मतदान के अधिकार जस के तस रहते हैं।
पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने संसद की संयुक्त समिति (JPC) को बताया कि लोकसभा और राज्य विधान सभा के चुनावों को एक साथ कराने का प्रयास संविधान की मूल संरचना या संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। यह समिति संविधान (एक सौ उन्तालीसवां संशोधन) विधेयक, 2024, की समीक्षा कर रही है, जिसका उद्देश्य चुनावों को समन्वित करना है।
गवई ने गुरुवार, 12 फरवरी, 2026 को हुई बैठक में कहा कि यह कानून केवल “चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव” लाता है और इससे संविधान की मूल सिद्धांतों या न्यायशास्त्र का उल्लंघन नहीं होता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान के अधिकार और चुनाव की संरचना जस की तस बनी रहती है, इसलिए यह संशोधन संविधान के अनुरूप है।
पूर्व CJI ने आगे बताया कि संसद के पास इस प्रकार के कानून लाने की पूरी क्षमता है और यह निर्णय विधायी क्षेत्राधिकार में आता है। उनका कहना था कि चुनावों का समन्वयन केवल तकनीकी और कार्यप्रणाली संबंधी बदलाव है, न कि संविधान के मूल ढांचे या नागरिक अधिकारों का हनन।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब तक इस पर छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने अपनी राय JPC के सामने रखी है। इनमें से दो ने विधेयक को संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन बताया, जबकि चार ने कहा कि यह संविधान के अनुरूप रहेगा। गवई की व्याख्या ने इस बहस में यह स्पष्ट किया कि चुनावों का समय-संयोजन मूलभूत संवैधानिक सिद्धांतों को प्रभावित नहीं करता।
संशोधन का उद्देश्य चुनावों को सुगम और लागत प्रभावी बनाना है, ताकि सरकारों के कार्यकाल और संसदीय प्रक्रियाओं में समन्वय स्थापित किया जा सके।
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