जी7 बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों पर सहमति की कोशिश, अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ विवाद से बढ़ा तनाव
जी7 बैठक में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा हुई, लेकिन अमेरिका-यूरोपीय संघ टैरिफ विवाद से एकजुटता पर असर पड़ता दिख रहा है।
पेरिस में आयोजित जी7 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टैरिफ विवाद ने इस एकजुटता को चुनौती दी है।
जी7 समूह, जिसमें प्रमुख विकसित देश शामिल हैं, चीन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ तत्वों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के उपाय तलाश रहा है। वर्तमान में इन खनिजों के उत्पादन और आपूर्ति पर चीन का दबदबा है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है।
फ्रांस के विदेश व्यापार मंत्री निकोलस फोरिसिएर ने बैठक में पहुंचते ही कहा कि उनके देश की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक ठोस उपलब्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि जी7 देश इस दिशा में ठोस प्रगति करेंगे, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता समाप्त की जा सके।
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बैठक में शामिल अधिकारियों ने बताया कि चीन पर निर्भरता घटाने को लेकर सभी देशों में व्यापक सहमति है, लेकिन इसे लागू करने के तरीकों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूरोपीय संघ में बने कारों पर टैरिफ को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर सकता है। उनका आरोप है कि यूरोपीय संघ ने स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में हुए व्यापार समझौते का पालन नहीं किया है।
जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री कैथरीना राइखे ने बताया कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रही हैं। जर्मनी का ऑटोमोबाइल उद्योग पहले से ही चीन में कमजोर मांग, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और बढ़ती लागतों के कारण दबाव में है।
वहीं, यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविच ने कहा कि उन्होंने पेरिस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के साथ टर्नबेरी समझौते पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को इस समझौते का सम्मान करना चाहिए और अपने वादों को पूरा करना जरूरी है।
जी7 बैठक में औद्योगिक उत्पादन की अधिकता, विशेषकर चीन से संबंधित, और विश्व व्यापार संगठन में सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक संतुलन को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
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