भारत के ऊर्जा संक्रमण और शहरी जलवायु चुनौतियों पर मंथन, IIT मद्रास में जुटे वैश्विक शोधकर्ता
IIT मद्रास में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों ने भारत के ऊर्जा संक्रमण और शहरी जलवायु चुनौतियों पर चर्चा की तथा सस्टेनेबल इंडिया 2025 रिपोर्ट जारी की।
भारत के ऊर्जा संक्रमण और शहरी जलवायु चुनौतियों को समझने और समाधान तलाशने के उद्देश्य से IIT मद्रास में एक महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो इंडिया फाउंडेशन (UTIF), IIT मद्रास के स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के स्कूल ऑफ सिटीज़ के सहयोग से आयोजित “सिटीज़ ऑफ केयर कॉन्फ्रेंस” का उद्घाटन IIT मद्रास रिसर्च पार्क में किया गया। इस सम्मेलन में दुनिया भर की प्रमुख यूनिवर्सिटियों, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय शहरों के लिए सतत शहरी विकास पर पुनर्विचार करना और जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना रहा। इस दौरान जारी की गई “सस्टेनेबल इंडिया 2025” रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को अब जलवायु लक्ष्यों की घोषणा से आगे बढ़कर ठोस क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा, विशेष रूप से ऊर्जा संक्रमण, कचरा प्रबंधन और शहरी लचीलापन के क्षेत्रों में, ताकि वर्ष 2030 और 2070 के जलवायु लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ऊर्जा संक्रमण एक निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है, वहीं अब उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बड़े स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि उद्योगों पर “हरित” बनने का दबाव तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब तक व्यावहारिक नीतियां, सुलभ वित्तपोषण और मजबूत निगरानी तंत्र मौजूद न हों।
सिटीज़ ऑफ केयर सम्मेलन में 90 से अधिक वैश्विक शोधकर्ता, नीति विशेषज्ञ और निवेशक शामिल हुए। सम्मेलन में जल–खाद्य–कचरा प्रणालियों के दृष्टिकोण से शहरी जलवायु कार्रवाई पर चर्चा की गई। इसमें पूर्ण सत्र, तीन विषयगत शोध सत्र, 15 शोध प्रस्तुतियां और वैश्विक व भारतीय विशेषज्ञों को जोड़ने वाला पैनल शामिल रहा।
सम्मेलन के दौरान UTIF और सस्टेनेबिलिटी आधारित मीडिया मंच REVOLVE के सहयोग से “सस्टेनेबल इंडिया 2025” रिपोर्ट जारी की गई। यह रिपोर्ट भारत के विभिन्न शहरों, राज्यों और क्षेत्रों में हो रहे जलवायु और सतत विकास प्रयासों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
IIT मद्रास की प्रोफेसर इंदुमती एम. नंबी ने कहा कि प्रयोगशाला से बाजार तक की यात्रा लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे मंच शोधकर्ताओं, सरकारों, उद्योगों और निवेशकों को वास्तविक समस्याओं पर मिलकर काम करने का अवसर देते हैं और प्रभाव आधारित निवेश को बढ़ावा देते हैं।
सम्मेलन में भारत और विदेशों के कई प्रमुख संस्थानों के वक्ताओं ने हिस्सा लिया। चर्चाओं का केंद्र शोध को नीति निर्माण से जोड़ना, बहु-क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना और शहरी चुनौतियों के एकीकृत समाधान विकसित करना रहा। यह सम्मेलन भारत में जलवायु-संवेदनशील और टिकाऊ शहरी भविष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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