जांच में बड़ा खुलासा: गोवा का आग से तबाह नाइटक्लब नमक के खेत पर अवैध रूप से बना, बिना लाइसेंस चल रहा था
मजिस्ट्रियल जांच में खुलासा हुआ कि गोवा का नाइटक्लब नमक के खेत पर अवैध रूप से बना था और बिना लाइसेंस चल रहा था। लापरवाही और मिलीभगत से 25 लोगों की मौत हुई।
गोवा में दिसंबर की शुरुआत में हुई भीषण आग की घटना को लेकर गठित मजिस्ट्रियल जांच समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिस नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हुई थी, वह एक नमक के खेत (सॉल्ट पैन) के बीच अवैध रूप से बनाया गया था और बिना वैध व्यापार लाइसेंस के संचालित हो रहा था। जांच रिपोर्ट 31 दिसंबर 2025 को सार्वजनिक की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नामक यह नाइटक्लब उत्तर गोवा के अर्पोरा गांव में स्थित था और किसी भी कानून के तहत इस स्थान पर निर्माण की अनुमति नहीं थी। साइट स्केच से स्पष्ट होता है कि यह षट्भुजाकार ढांचा सीधे नमक के खेत/जल क्षेत्र के बीच खड़ा था, जो भूमि राजस्व संहिता की धारा 32 और तटीय क्षेत्र नियमों का उल्लंघन है।
जांच में सामने आया कि 16 दिसंबर 2023 को अर्पोरा-नागोआ ग्राम पंचायत ने ‘बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा एलएलपी’ को बार, रेस्टोरेंट और नाइटक्लब चलाने का लाइसेंस दिया था, जिसकी वैधता 31 मार्च 2024 तक थी। इसके बाद लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ, फिर भी नाइटक्लब अवैध रूप से चलता रहा और पंचायत ने परिसर को सील करने की कोई कार्रवाई नहीं की।
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पंचायत सचिव रघुवीर बागकर और सरपंच रोशन रेडकर ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि न तो लाइसेंस रद्द होने की सूचना अन्य विभागों को दी गई और न ही परिसर को सील किया गया। रिपोर्ट ने इसे संपत्ति मालिकों के साथ मिलीभगत बताया है।
जांच में यह भी सामने आया कि लाइसेंस आवेदन में जालसाजी, दस्तावेजों की कमी और जल्दबाजी में अनुमति दी गई। नाइटक्लब में न तो पर्याप्त अग्नि सुरक्षा इंतजाम थे और न ही आपातकालीन निकास। 6 दिसंबर की रात बिना सुरक्षा उपायों के की गई आतिशबाजी से आग भड़क गई।
इस मामले में पुलिस ने अब तक नाइटक्लब के तीन मालिकों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच सरकारी अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। मामला भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है।
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