राष्ट्रीय पुरस्कार किसी राज्य की संपत्ति नहीं, गुजरात बीजेपी ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना
गुजरात बीजेपी ने उद्धव ठाकरे की राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को लेकर टिप्पणी पर पलटवार किया। पार्टी ने पुरस्कारों को पूरे देश का सम्मान बताते हुए केवड़िया आयोजन का बचाव किया।
गुजरात बीजेपी ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के आयोजन स्थल को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे की हालिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुजरात बीजेपी ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किसी एक राज्य या क्षेत्र की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिष्ठित सम्मान है।
गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए देशभर की अलग-अलग भाषाओं में बनी फिल्में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उन्होंने कहा कि यह समारोह उत्तर, दक्षिण और पश्चिम भारत समेत विभिन्न क्षेत्रों के निर्देशकों, अभिनेताओं, कहानीकारों और फिल्म निर्माण से जुड़े सभी कलाकारों एवं तकनीकी कर्मचारियों को सम्मानित करता है।
केवड़िया कॉलोनी में समारोह आयोजित करने के फैसले का बचाव करते हुए पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह पहले भी दिल्ली से बाहर आयोजित किए जाते रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चेन्नई जैसे शहरों में भी ऐसे समारोह आयोजित हो चुके हैं। उनके अनुसार, केवड़िया ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक है।
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पटेल ने कहा कि केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी स्थित है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है और देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करती है।
गुजरात बीजेपी प्रवक्ता ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट पर गुजरात के विकास का लगातार विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान भी इस गुट ने राजनीतिक लाभ के लिए गुजरात और गुजरातियों को निशाना बनाया था।
पटेल ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मतदाताओं ने उनके गुट को उसकी जगह दिखा दी है। उन्होंने दावा किया कि ठाकरे का गुट वास्तविक शिवसेना नहीं, बल्कि केवल ‘उद्धव सेना’ है और राजनीतिक परिदृश्य में असली शिवसेना एक ही है।
अपने बयान के अंत में पटेल ने उद्धव ठाकरे से संकीर्ण राजनीतिक सोच छोड़कर देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हित में सोचने में विफल रहने के कारण ही ठाकरे के गुट का देशभर में राजनीतिक प्रभाव कम हुआ है।
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