गुजरात की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा बल, 12 वर्षों में 4,500 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित
गुजरात ने 12 वर्षों में 4,500 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। विकास योजनाओं से गांवों में रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
गुजरात ने पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और ग्रामीण विकास मंत्री कुंवरजी बावलिया के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा है कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 12 वर्षों में गुजरात में 4,500 लाख से अधिक मानव-दिवस (पर्सन-डे) रोजगार का सृजन किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों को आजीविका का स्थायी आधार मिला है। रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
राज्य सरकार ने ग्रामीण सड़कों, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं, सामुदायिक परिसंपत्तियों और अन्य विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इन योजनाओं के माध्यम से न केवल रोजगार उपलब्ध हुआ, बल्कि गांवों में जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है और किसानों को भी लाभ पहुंचा है।
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सरकार का कहना है कि विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण गुजरात के गांव आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी कई कार्यक्रम चलाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन पर लगातार ध्यान देने से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। गुजरात मॉडल को ग्रामीण विकास और रोजगार उपलब्ध कराने के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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