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गुजरात यूसीसी विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी, बीजेपी ने समानता की दिशा में कदम बताया; कांग्रेस ने बताया ध्यान भटकाने वाला मुद्दा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूसीसी विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। बीजेपी ने इसे समानता की दिशा में कदम बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे ध्यान भटकाने वाला मुद्दा कहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात में इस कानून के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। यह विधेयक राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक नियम लागू करने की व्यवस्था से जुड़ा है।

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद गुजरात यूसीसी विधेयक के कानून बनने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राज्य में इसके लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े नियमों में समान व्यवस्था लागू करने का प्रावधान होगा।

भारतीय जनता पार्टी ने विधेयक को समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। पार्टी ने इसे सामाजिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में आगे बढ़ने वाला कदम बताया।

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वहीं, कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है। कांग्रेस ने यूसीसी को ‘ध्यान भटकाने वाला मुद्दा’ बताया और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि ऐसे मुद्दों के बजाय जनता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

गुजरात में यूसीसी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद पहले से रहे हैं। विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य में इसके प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

गुजरात सरकार के लिए यह कानून एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है, जबकि इसके प्रभाव और विभिन्न नागरिक मामलों पर पड़ने वाले असर को लेकर आगे भी सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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