ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना को धुआंरहित ईंधन की एकमात्र आपूर्ति गुवाहाटी रिफाइनरी ने की
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गुवाहाटी रिफाइनरी ने भारतीय सेना को 19 हजार मीट्रिक टन विशेष धुआंरहित ईंधन की आपूर्ति की, जो अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में उपयोगी है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के स्वामित्व वाली गुवाहाटी रिफाइनरी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों को धुआंरहित विशेष ईंधन की एकमात्र आपूर्ति की। गुरुवार (29 जनवरी 2026) को रिफाइनरी प्रबंधन ने बताया कि इस दौरान सेना को कुल 19 हजार मीट्रिक टन (TMT) विशेष ईंधन उपलब्ध कराया गया।
गुवाहाटी रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक सुनील कांति ने कहा कि यह रिफाइनरी देश की चुनिंदा इकाइयों में से एक है, जो लो सल्फर लो एरोमैटिक्स एसकेओ (LSLA SKO) का उत्पादन करने में सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना को यही विशेष ईंधन केवल गुवाहाटी रिफाइनरी ने उपलब्ध कराया।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने कुछ समय पहले अत्यधिक ठंडे इलाकों में तैनात जवानों के लिए ऐसा ईंधन तैयार करने का अनुरोध किया था, जिससे जलने पर धुआं न निकले। आमतौर पर सभी प्रकार के ईंधन जलने पर धुआं छोड़ते हैं, लेकिन यह ईंधन इस समस्या से मुक्त है। इसके बाद रिफाइनरी की अनुसंधान एवं विकास (R&D) टीम ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए LSLA SKO विकसित किया।
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सुनील कांति ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रिकॉर्ड समय में 19 TMT LSLA SKO का उत्पादन कर इसे मिसामारी, सिलीगुड़ी और आगरा भेजा गया। मिसामारी से यह ईंधन अरुणाचल प्रदेश, सिलीगुड़ी से सिक्किम और आगरा से लद्दाख क्षेत्र में तैनात भारतीय सेना तक पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि यह गुवाहाटी रिफाइनरी के लिए गर्व की बात है कि उसने देश की रक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। LSLA SKO में सल्फर की मात्रा केवल 1 पार्ट पर मिलियन (ppm) है, जबकि अनुमेय सीमा 10 ppm है। गुवाहाटी रिफाइनरी देश की पहली सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी है, जिसकी स्थापना जनवरी 1962 में हुई थी। वर्तमान में इसकी क्षमता बढ़कर 1.2 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो चुकी है।
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