एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल विवाद पर हरदीप पुरी का जवाब, कहा- इंजन खराब होने के दावे बेबुनियाद
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इंजन खराब होने के दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई20 ईंधन को लेकर चल रहे विवाद को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ई20 पेट्रोल को लेकर उठाई जा रही चिंताएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि गलत जानकारी और गलत व्याख्या के कारण विवाद पैदा हुआ है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ दावे किए गए थे कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब हो सकते हैं, ईंधन की क्षमता कम हो सकती है और इससे कीड़े-मकौड़े आकर्षित होते हैं। सरकार ने इन दावों को लगातार भ्रामक बताया है और कहा है कि इनके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
हरदीप सिंह पुरी ने सवाल उठाया कि जब ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल एक साल से अधिक समय से हो रहा है, तो अब अचानक इस पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में करीब 20 करोड़ दोपहिया वाहन और 20 लाख चार पहिया वाहन इस ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वाहन निर्माता कंपनियां और सर्विस से जुड़े लोग भी इसके इस्तेमाल में कोई समस्या नहीं बता रहे हैं।
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उन्होंने यह भी बताया कि भारत पिछले साढ़े तीन साल से ई15 ईंधन का इस्तेमाल कर रहा है और इस दौरान कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।
ई25 ईंधन पर अभी कोई फैसला नहीं
ई25 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी पेट्रोलियम मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी ई25 ईंधन को लागू करने का कोई फैसला नहीं लिया है। फिलहाल इसके लिए परीक्षण किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पुरी ने कहा कि भविष्य में किसी भी नए ईंधन मिश्रण को लागू करने का फैसला वैज्ञानिक परीक्षणों और वाहन निर्माता कंपनियों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
क्या है ई20 पेट्रोल विवाद?
ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया था कि इससे वाहनों का माइलेज कम होता है और लंबे समय में इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 के लिए तैयार किए गए वाहन इसे सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।
पुरी ने कहा कि सरकार किसी भी नए ईंधन को लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं के साथ लगातार संपर्क में रहती है। उन्होंने कहा कि कार निर्माता कंपनियां ई20 को लेकर संतुष्ट हैं और उन्होंने इसके इस्तेमाल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
ई85 ईंधन के विस्तार में लगेगा समय
मंत्री ने ई85 ईंधन के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें एथेनॉल की मात्रा काफी अधिक होती है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती चरण में है और इसके लिए नए पेट्रोल पंपों तथा जरूरी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।
केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो, प्रदूषण घटे और गन्ने व मक्का जैसी फसलों से एथेनॉल उत्पादन के जरिए किसानों को लाभ मिले।
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में 95 आरओएन (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) वाले अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई20 को अनिवार्य किया है। सरकार का कहना है कि यह ईंधन उपयुक्त वाहनों के लिए सुरक्षित है और भविष्य में अधिक एथेनॉल मिश्रण पर कोई भी निर्णय विस्तृत परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
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