हिमाचल प्रदेश ने BRICS आपदा जोखिम बैठक में AI-आधारित शहरी लचीलापन प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन किया
हिमाचल प्रदेश ने BRICS आपदा जोखिम बैठक में GIS आधारित शहरी लचीलापन प्लेटफॉर्म पेश किया। राज्य ने आपदा तैयारी और शहरी शासन में भू-स्थानिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।
हिमाचल प्रदेश ने ओडिशा के पुरी में आयोजित दूसरी BRICS तकनीकी आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) बैठक में अपने GIS आधारित शहरी लचीलापन (Urban Resilience) प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से राज्य ने यह दिखाया कि कैसे आधुनिक भू-स्थानिक (Geospatial) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का उपयोग कर आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
राज्य सरकार ने इस मंच पर बताया कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में भूस्खलन, बादल फटना और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम अधिक रहता है। ऐसे में समय रहते चेतावनी प्रणाली और डेटा आधारित योजना बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो रियल-टाइम डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और GIS मैपिंग के जरिए आपदा जोखिम क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करता है।
इस प्लेटफॉर्म की मदद से प्रशासन न केवल आपदाओं की पूर्व चेतावनी जारी कर सकता है, बल्कि राहत और बचाव कार्यों को भी अधिक तेज़ और प्रभावी तरीके से संचालित कर सकता है। इसके अलावा शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास में भी यह तकनीक अहम भूमिका निभा रही है।
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BRICS बैठक में हिमाचल प्रदेश की इस पहल को एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा गया, जो दर्शाता है कि कैसे छोटे और पहाड़ी राज्य भी तकनीक के उपयोग से आपदा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों ने इसे भविष्य के स्मार्ट और सुरक्षित शहरों की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
राज्य प्रतिनिधियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश लगातार डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है, ताकि आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके और नागरिक सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके।
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