IEW 2026: उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा संक्रमण में प्राकृतिक गैस को बताया गया अहम आधार
IEW 2026 में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक गैस को ऊर्जा संक्रमण का अहम साधन बताया, कोयले से गैस की ओर बदलाव को उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी माना।
नई दिल्ली: इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 के पहले दिन आयोजित एक उच्चस्तरीय नेतृत्व पैनल में प्राकृतिक गैस और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, आर्थिक विकास को समर्थन देने और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को व्यावहारिक दिशा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित इस चर्चा में वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
“प्राकृतिक गैस और ऊर्जा परिवर्तन का पुनर्स्थापन: व्यावहारिक ब्रिजिंग संसाधन से निर्णायक गंतव्य ईंधन” विषय पर आयोजित पैनल में इंडियनऑयल के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी, गेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संदीप कुमार गुप्ता, एडनॉक गैस की सीईओ फातिमा अल नुआइमी और एक्सेलरेट एनर्जी के प्रेसिडेंट व सीईओ स्टीवन कोबोस शामिल रहे।
पैनलिस्टों ने कहा कि वर्ष 2050 तक वैश्विक गैस मांग में 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है। चर्चा में कोयले से गैस की ओर संक्रमण को निकट भविष्य में उत्सर्जन कम करने और ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय बताया गया।
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भारतीय परिप्रेक्ष्य में वक्ताओं ने देश के गैस इकोसिस्टम के तेज विस्तार पर जोर दिया। घरेलू उत्पादन में वृद्धि, विविधीकृत एलएनजी आयात और पाइपलाइन, टर्मिनल तथा सिटी गैस वितरण नेटवर्क में निरंतर निवेश को इसकी प्रमुख वजह बताया गया। उर्वरक, परिवहन ईंधन और शहरी ऊर्जा पहुंच जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की अहम भूमिका रेखांकित की गई।
पैनल ने यह भी कहा कि ऊर्जा संक्रमण का अर्थ अचानक प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि ऊर्जा में वृद्धि होना चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा के साथ गैस आधारित बिजली उत्पादन, दक्षता सुधार, मीथेन उत्सर्जन में कमी और उभरती कार्बन प्रबंधन तकनीकों के साथ पूरक भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, पैनलिस्टों ने लागत को एक बड़ी चुनौती बताया और कहा कि कोयले को प्रभावी रूप से प्रतिस्थापित करने के लिए प्राकृतिक गैस और एलएनजी को अधिक किफायती बनाना आवश्यक है।
नीतिगत स्थिरता, सहायक नियामक ढांचा, दीर्घकालिक वित्त तक पहुंच, बुनियादी ढांचे की लागत में कमी और पारदर्शी वैश्विक गैस बाजार के विकास पर भी जोर दिया गया। एलएनजी आयात क्षमता, री-गैसीफिकेशन सुविधाएं, पाइपलाइन नेटवर्क और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के विस्तार को विश्वसनीय और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति के लिए जरूरी बताया गया।
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