आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला डीन पद से निलंबित, साहिल वाकोडे मामले में एफआईआर दर्ज
आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की डीन पद की जिम्मेदारी निलंबित की। साहिल वाकोडे के पिता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में लगाए आरोपों की जांच जारी है।
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की डीन पद की जिम्मेदारी निलंबित कर दी गई है। संस्थान के निदेशक की ओर से छात्रों को भेजे गए ईमेल के जरिए यह जानकारी दी गई। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने प्रशासनिक कार्रवाई के विस्तृत कारण और इसकी अवधि के बारे में अभी जानकारी नहीं दी है।
यह घटनाक्रम दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कुछ दिन बाद सामने आया है। प्रोफेसर दूल्ला प्रशासनिक मामलों के डीन थे। साहिल के पिता की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
शिकायत में साहिल के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को कथित तौर पर परेशान किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर दूल्ला ने पिछले तीन महीनों के दौरान उनके बेटे के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और फिलहाल इन्हें साबित तथ्य नहीं माना गया है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को सौंपे जाने के बाद छात्र की मौत और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी।
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फैकल्टी फोरम ने किया प्रोफेसर का समर्थन
आरोपों के बीच आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर दूल्ला के प्रति समर्थन जताया और परीक्षा के दौरान उनके आचरण का बचाव किया। फोरम के अनुसार, उन्होंने संस्थान के नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। उनका कहना था कि छात्र के पास कथित तौर पर बिना अनुमति स्मार्टफोन था।
आईआईटी बॉम्बे ने पहले बताया था कि साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के छात्र थे और परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे। संस्थान के अनुसार, छात्र ने उत्तर प्राप्त करने के प्रयास में प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड किया था। आईआईटी बॉम्बे ने कहा था कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
फैकल्टी फोरम ने बताया कि प्रोफेसर दूल्ला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मध्य-सेमेस्टर परीक्षा में निरीक्षक की भूमिका निभा रहे थे। फोरम ने छात्र की कथित गतिविधि को “शैक्षणिक अनियमितता” बताया।