AI समिट 2026: IIT कानपुर का रोबोडॉग आपदा प्रतिक्रिया मशीन के रूप में बना आकर्षण
IIT कानपुर के छात्रों द्वारा विकसित रोबोडॉग ने AI समिट 2026 में ध्यान खींचा। यह खतरनाक या कठिन क्षेत्रों में निरीक्षण और आपदा राहत कार्यों में गेम-चेंजर साबित होगा।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट 2026 में IIT कानपुर के छात्रों द्वारा विकसित चौपाय रोबोटिक कुत्ते (रोबोडॉग) ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह नवीन तकनीकी उपकरण खतरनाक और कठिन क्षेत्रों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे समिट में सबसे प्रभावशाली तकनीकी प्रदर्शनों में से एक के रूप में प्रदर्शित किया गया।
रोबोडॉग विशेष रूप से निर्माण स्थलों, ऑक्सीजन रहित क्षेत्रों और ऐसे क्षेत्रों में उपयोगी है जहाँ इंजीनियरिंग निरीक्षण मानव के लिए जोखिम भरा या असुरक्षित होता है।
इस रोबोट को उच्च-जोखिम क्षेत्रों और महत्वपूर्ण निरीक्षणों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में मदद के लिए तैनात किया जा सकता है। यह पुराने, ऊँचे या संरचनात्मक रूप से कमजोर भवनों की जांच कर सकता है, जहाँ इंसानी निरीक्षण जोखिमपूर्ण होता है। बड़े कारखाने और गोदाम, जहाँ दरारें या संरचनात्मक कमजोरियाँ पहचानना मुश्किल होता है, वहां भी रोबोडॉग मददगार साबित होगा।
और पढ़ें: AI को लोकतांत्रिक बनाना चाहिए: पीएम मोदी का बयान
यह रोबोट लंबी औद्योगिक पाइपलाइनों में प्रवेश करके निरीक्षण और मरम्मत कार्य कर सकता है, जहाँ इंसानी पहुँच सीमित या जहरीली परिस्थितियों के कारण असंभव होती है। अत्याधुनिक सेंसर से लैस यह दरारें, संरचनात्मक विसंगतियाँ और खतरनाक स्थितियों का पता लगा सकता है और डेटा ऑन-साइट इंजीनियर या पर्यवेक्षक को भेज सकता है।
IIT कानपुर के छात्र दया किरण ने कहा, “इसे चौपाय रोबोट या डॉग रोबोट कहा जाता है। इसके कई उपयोग हैं। मुख्य कार्य खतरनाक उद्योगों और स्थानों का निरीक्षण करना है, जैसे जहरीली गैस वाले क्षेत्र, खनन क्षेत्र या तेल-गैस कंपनियाँ।”
डेवलपर्स का मानना है कि रोबोडॉग औद्योगिक सुरक्षा ढाँचे और आपातकालीन बचाव प्रणालियों का अनिवार्य हिस्सा बन सकता है। इसकी चुस्ती, टिकाऊपन और जटिल वातावरण को समझने की क्षमता इसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साधन बनाएगी।
और पढ़ें: मैक्रॉन ने पीएम मोदी के साथ AI जनित दिल फोटो साझा की, AI प्रभाव सम्मेलन से पहले उत्साह का संकेत