IIT मंडी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया भूस्खलन चेतावनी तंत्र, जमीन की सूक्ष्म हलचल भी करेगा पहचान
आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग आधारित भूस्खलन चेतावनी प्रणाली विकसित की है, जो एक मिलीमीटर से कम जमीन की हलचल पहचानकर 90 प्रतिशत सटीकता से पहले चेतावनी दे सकती है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (आईआईटी मंडी), हिमाचल प्रदेश के वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक रियल-टाइम भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की है। यह तकनीक जमीन में होने वाली बेहद छोटी हलचलों का पता लगाने में सक्षम है और संभावित भूस्खलन के बारे में पहले ही चेतावनी दे सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रणाली को मंडी जिला के तीन भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में स्थापित किया गया है। शुरुआती परीक्षणों में इस मॉडल ने 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ भूस्खलन की भविष्यवाणी करने में सफलता हासिल की है।
यह प्रणाली मशीन लर्निंग और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों पर आधारित है। जमीन में लगाए गए विशेष सेंसर मिट्टी और चट्टानों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। यदि जमीन में हल्की-सी भी हलचल होती है, तो सेंसर तुरंत उसे रिकॉर्ड कर लेते हैं और यह जानकारी रियल-टाइम में नियंत्रण केंद्र तक भेज दी जाती है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रणाली एक मिलीमीटर से भी कम जमीन के खिसकने या सरकने की गतिविधि को पहचान सकती है। इतनी सूक्ष्म निगरानी से संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकता है और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को पहले ही सतर्क किया जा सकता है।
इस परियोजना को नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज के सहयोग से विकसित किया गया है। आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में अक्सर होने वाले भूस्खलन से जान-माल की हानि को कम करने में यह तकनीक बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में इस प्रणाली को हिमाचल प्रदेश और अन्य पर्वतीय राज्यों के अधिक संवेदनशील इलाकों में भी लागू किया जा सकता है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय पर जानकारी मिल सकेगी और बचाव कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
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