परिसीमन विधेयक से संघीय ढांचे में असंतुलन होगा: इमरान मसूद
इमरान मसूद ने परिसीमन विधेयक को संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया। विपक्ष ने लोकसभा में विधेयकों का विरोध किया, जबकि सरकार ने इसे संवैधानिक सुधार बताया।
लोकसभा में परिसीमन विधेयक, 2026 और संविधान (एक सौ इकतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2026 तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष ने इन विधेयकों पर जोरदार आपत्ति दर्ज कराई है और संसद में विभाजन (डिवीजन वोट) की मांग की है।
कांग्रेस नेता और सांसद इमरान मसूद ने परिसीमन विधेयक पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश के संघीय ढांचे में असंतुलन पैदा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले राज्यों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार द्वारा लाया गया परिसीमन प्रस्ताव राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे कुछ राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार का तर्क है कि यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक ढांचे के तहत की जा रही है और इसका उद्देश्य प्रतिनिधित्व को अधिक न्यायसंगत और जनसंख्या आधारित बनाना है।
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संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली, जहां सत्ता पक्ष ने विधेयकों को महिलाओं के आरक्षण और प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं विपक्ष ने इसे संघीय संतुलन के खिलाफ बताते हुए विरोध जारी रखा।
इमरान मसूद ने कहा कि भारत की विविधता और संघीय संरचना उसकी सबसे बड़ी ताकत है, और किसी भी ऐसे बदलाव से बचना चाहिए जो राज्यों के अधिकारों को कमजोर करे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन प्रक्रिया पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार होगी तथा किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
फिलहाल यह मामला संसद में चर्चा और राजनीतिक टकराव का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है, और आगे की बहस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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